कुछ अल्फाज लिख ही रहा था
Updated: Aug 2, 2025
By Rupam Ramesh Dange
कुछ अल्फाज लिख ही रहा था, के सोचा तुम्हें याद कर लूं,
तुम्हें याद न करूं तो कैसे हो पाएंगे, अल्फाज पूरे, मेरे,
याद करते ही तुम्हारी एक - एक अल्फाज कागज पर उतरने लगे,
कागज पर कविता लिखने में बैठा, एक अलग विषय पर,
करते ही तुम्हारी याद, मैं तुम्हें ही लिखने बैठा,
हर एक अल्फाज में तुम ही हो जैसे, हर एक अल्फाज ने तुमको ही सींचा हो जैसे, भतेरे विशेषणों से नवाजा जैसे,
अल्फाजों को पड़ा महंगा, लिखना तुम्हें,अल्फाज पड़ गए सीमित,
एक क्षेत्रफल की सीमा पर आकर रुक गए वो भीं,
कहां उन्होंने भीं, हम तुम्हें पूरा कैसे लिख सकते ?
हम भीं लिख सकते हैं तुम्हें एक हद तक,
हमे भीं तुम्हें पूरा लिखने की इजाजत नहीं,
छोड़ दिया उन्होंने श्वास वही, लेते लेते नाम तुम्हारा…
By Rupam Ramesh Dange

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