किसी बला से मत डरो तुम।
By Budhraj Singh Khinchi
किसी बला से मत डरो तुम।
मौत से पहले मत मरो तुम।
मौत का हमेशा अपना कोई ना कोई बहाना होता है।
मौत को तो किसी भी हाल में एक दिन आना ही होता है।
मौत को तो जब जिस बहाने से आना होगा आएगी ही।
किसी को बीमारी के बहाने,
किसी को महामारी के बहाने,
किसी को किसी घटना के बहाने,
किसी को किसी दुर्घटना के बहाने,
किसी को हत्या के बहाने,
किसी को आत्महत्या के बहाने,
किसी को किसी की बर्बरता के बहाने,
किसी को देह की जर्जरता के बहाने
मौत एक दिन लेकर जाएगी ही जाएगी।
इसलिए
जब तक जीवन है
भरपूर जिओ तुम।
मौत से पहले मत मरो तुम।
मृत्यु कहाँ जीवन का अन्त है।
मृत्यु तो मात्र देहान्त है।
देह तो आत्मा का मात्र एक वस्त्र है।
जीवन में नैराश्य मृत्यु का मात्र एक अस्त्र है।
जीवन मे आशा और विश्वास का संचार करो तुम।
मौत से पहले मत मरो तुम।
देह नश्वर तुम तो शाश्वत हो।
फिर भी क्यों नहीं आश्वस्त हो?
क्योंकि तुम ख़ुद को ही नहीं पहचानते हो।
तुम अपने आप को नश्वर देह ही तो मानते हो।
मूर्खता में नश्वर चीजों को संचित किए जाते हो।
शाश्वत परमानन्द से ख़ुद को वंचित किए जाते हो।
छल, दम्भ, द्वेष, पाखण्ड, झूठ द्वारा अनाचार किए जाते हो।
दूसरों का हक़ छीनकर उन पर अत्याचार किए जाते हो।
सन्तोषी ही सदा सुखी है, फिर संचय में क्या रखा है?
दस्युओं ने नहीं, दाताओं ने ही हमेशा अमृतरस चखा है।
कल की फ़िक्र में जीने वालों
इस पल को तो पूरा जिओ तुम।
मौत से पहले मत मरो तुम।
कल की फ़िक्र में जीने वाला कभी आज को जी नहीं पाया।
जो आज को जी नहीं पाया, उसका कल कभी ना अच्छा आया।
जीवन भर हिसाब लगाया।
लेकिन कभी कुछ ना समझ आया।
जीवन में क्या खोया-पाया।
मरणोपरान्त भी बन्धन बन गई
संचित की थी जो सब माया।
मृगतृष्णा की अँधी दौड़ में सारा जीवन वृथा गँवाया।
ज़मीर बेचकर जो भी कमाया अंत में कुछ भी काम ना आया।
इसलिए
माया का मत लोभ करो तुम।
मौत से पहले मत मरो तुम।
प्रकृति का नियम सरल है।
विषवृक्ष से मिलता गरल है।
बबूल बोने से आम नहीं आते।
इतना सा क्यों तुम समझ ना पाते?
जो दोगे वही मिलेगा।
एक दोगे सौ मिलेगा।
जो मिला उससे क्यों गिला है?
कर्मों का ही तो फल मिला है।
जो भी कर रहे हो, प्रत्यक्ष वो ही भर रहे हो।
लालच में अँधे होकर फिर भी नहीं सुधर रहे हो।
हराम की कमाई में आराम नहीं है।
बेवजह जहाँ में कुछ भी हराम नहीं है।
ईमान से खजाने भरो तुम।
किसी बला से मत डरो तुम।
मौत से पहले मत मरो तुम।
By Budhraj Singh Khinchi

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