किसान महान
By Vijeta
धूप में तपता किसान
फिर भी भरता वो लगान
भूख सबकी मिटाने को
दिन भर पिसता ख़ुद किसान
अपनी चकाचौंध दुनिया बसाने को इंसान
कर रहा सारे जंगल वीरान
बारिश और धूप का मेल नहीं
कभी भी आ जाता तूफ़ान
फिर भी हिम्मत जुटाता किसान
सब कुछ नष्ट होने पर भी जोतता अपने खेत खलिहान
लहराती फ़सलो को देख ही
ख़ुशी से मन उछल उठता उसका
समझ वही सकता है ये सब
खून पसीना लगा है जिसका
रात के अंधियारे में भी
रोशनी रहती है उसके घर
बच्चो को पढ़ाता लिखाता
माता पिता भी ना होते बेघर
कुछ अन्न के दानो में ही घर का चौका सज जाता है
बैठते सब संग खाने को
सबका पेट भर जाता है
जहाँ इंसान इंसान का दुश्मन है
अपने फायदे के लिये करता
दूसरे की उम्मीदों का हरण है
दिखाता यह किसान, उन सबको दर्पण है
करता वो अपना जीवन हम सबको अर्पण है
सबकी भूख मिटाने को
अपना पेट वो काटता है
खुद के खून पसीने से
सबका घर अन्न से भरता है
थोक व्यापारी खा लेते उसकी मेहनत का फल
जी जान लुटाई जिसने खेतों में
वही बैठा इंतजार में
कि आएगी सुख समृद्धि कल
By Vijeta

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