किसान के ख्वाब और हकीकत
By Rashmita Potphode
अन्न बोया खेतो में, और झमामम बारिश आई!
लहलहाती फसलों ने, चेहरे पर मुस्कान है लाई !!
उसके सपनों में बेटी के हाथों में मेहंदी रचाई !
दुल्हन बनाकर बेटी की, घर से होगी विदाई !!
कृषक के ख्वाब और हकीकत को,दुनियां समझ न पाई !
बेटी की विदाई से पहले, पिता की हुई विदाई !!१!!
नींद खुली तो देखा अखबार, आँखे भरकर आई !
सरकार ने अनाजो की, कीमते है घटाई !!
कर्ज और बेटी की शादी, ये चिंता सताई!
किसान ने फिर खेत में, खुद की चिता सजाई !!
कृषक के ख्वाब और हकीकत को, दुनियां समझ न पाई !
बेटी की विदाई से पहले, पिता की हुई विदाई !!२!!
खलिहानो की मिट्टी चीखी, पगडंडी भी सहम रही !
धरती मां की गोद मे, फिर जिंदगी सिमट गई!!
अखबारो के पन्नो में, ये खबर भी सिमट गई!
और पत्रकारों की जेब पैसों से भर गई !!
कृषक के ख्वाब और हकीकत को, दुनियां कहा समझ रही!
बेटी की विदाई से पहले, पिता की विदाई हो गई !!३!!
By Rashmita Potphode

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