किराये का मकान!
- Hashtag Kalakar
- Oct 12, 2022
- 6 min read
By Kanchan Deora
सावन का महीना जैसे मीरा की आंखों से बरस रहा हो, कांपते हाथों से वो अलमारी में रखे कपड़ों को निकाल पास ही रखे बैग में लगा रही थी। बहुत सारे भाव उसके गीली आंखों से बार बार झांक रहे थे। इतनी कमजोरी पहले कभी नही लगी उसे, जैसे पैरों में जान ही ना हो। थोड़ा सुस्ताने के लिए वही अलमारी के पास ही गिर पड़ी । आंखें बहुत भारी हो रही थी, पलकों को बंद किया तो पापा का चेहरा सामने आ गया। सोचने लगी पापा से कितना झगड़ी थी मै रवि से शादी करने के लिये, मैने पापा को कितना समझाया कि रवि अच्छा लड़का है पर पापा नही माने, पापा चाहते थे मै पहले अपने करियर का सोचूं। और रवि को जौब पसंद नहीं थी मेरे लिए।
हारके मैने घर छोड़ दिया। रवि के साथ शादी करके लगा जैसे अब बस जीवन में कभी पीछे मूड़के नही देखूंगी । पापा को हमारी कोई परवाह नहीं, बहुत नाराज थी मै पापा से।
कब सात साल बीत गये मालूम ही नही लगा, जिंदगी कब रोमांस प्यार से हटकर सुबह पांच बजे के अलार्म से रात बारह बजे टूट के बिस्तर पे गिरने के बीच बस बंध के रह गयी थी । रवि एक प्राइवेट कंपनी मे मैनेजर के पद पर थे, सब कुछ बहुत ही सामन्य चल रहा था। पर मै बहुत खुश थी अपनी पसंद को पाके, और होउं भी क्यों ना। कल हमारी शादी की सातवीं सालगिरह है, रवि अपने औफिस के काम से मुम्बई गये हूए थे, और अभी वहाँ काम खत्म नही हुआ तो लौटने का कुछ भी कनफर्म नही था फिर भी दो दिन पहले से मैने तैयारियां शुरू भी कर दी थी, सोचा सरप्राइज दुंगी रवि को, सो उनको बिना बताए पार्टी की तैयारियां शुरू कर दी मैने। क्यों कि ये सरप्राइज था तो रवि को नही बताया था। सो कुछ अपने और कुछ रवि के दोस्तों की मैने लिस्ट बना ली थी। सोचा जैसे ही आने का कुछ कनफर्म होगा तो काल करके दोस्तों को इनवाइट कर लूंगी। और घर की साफ सफाई करके सजावट में लग गयी। कब सुबह से शाम हो गयी काम में पता ही नही लगा। मोबाइल रिंग करने लगा तो मै समझ गयी थी कि रवि का ही काल होगा, दौड़ के फोन की तरफ लपकी हाँ रवि का ही काल है सोच के मन ही मन मुस्करा रही थी मै।और खुद पे नाज कर सोचा देखा आज भी तुम्हारे काल का मुझे बिना मोबाइल देखे पता लग जाता है तो हमेशा की तरह इस बार भी मेरा पहला सवाल यही था "कहां पे हो, क्या कर रहे हो" वो बोले बस यहीं आफिस में ही हूं लगा हूं कि जल्दी काम खत्म करू और आ जाउ तुम्हारे पास, तुम्हें भी साथ आ जाना चाहिए था यहाँ बहुत वक्त लग रहा है। मै बोली आप तीन दिन में वापस आने का बोल रहे थे तो इसीलिए रुक गयी थी अब आगे से साथ ही जाया करूगी। मेरी बात काटते हुए रवि बोले मेरे मोबाइल की बैटरी खत्म है सो फोन बंद हो जाएगा, मैने कहा ओह! पर आफिस वाला मोबाइल तो आँन है ना। बोले नही उसकी भी जाने वाली है और आफिस से सीधे मै अपने एक पुराने दोस्त के घर जाउगा डिर्ंक का प्रोग्राम है। मैने कहा ओके लेकिन फोन चार्ज कर लेना। ओके कहा और रवि ने फोन काट दिया। सुबह से क्योंकि काम में व्यस्त थी तो मोबाइल चैक नहीं किया था, तो मोबाइल लेके वही सोफे पे रिलक्स हो बैठ मैसेज देख ही रही थी कि एक मेल रिसीव हुई कि होटल रूम बूक्ड इन दिल्ली साकेत, बुकिंग रवि के नाम की थी सोचा कहीं उंहे दिल्ली तो नही जाना पड़ रहा, और आज की ही डेट की बुकिंग है कनफर्म करने के लिए मैंने रवि को काल किया तो बैल जा रही थी पर रवि ने काट के फोन बंद कर दिया। दुसरा फोन लगाया तो वो भी बंद आया थोड़ा अजीब लग रहा था पर सोचा हो सकता है कि बैटरी औफ हो गयी हो। मै फिर से मोबाइल में लग गयी। फिर दोबारा से एक मेल और रिसीव हुई किसी दुसरे होटल मे बुकिंग। कुछ समझ नहीं आ रहा था हो क्या रहा फिर जब ध्यान से बुकिंग मेल चैक किया तो बुकिंग दो लोगों के लिए थी। सांस जहां की तहां रूक गयी अनचाही शंका से हाथ पैर ढंडे पड़ रहे थे। बहुत से सवाल कौंध रहे थे दिमाग मे । फिर से रवि को कौल लगाया पर अभी भी बंद ही था फिर खयाल आया बुकिंग मेल मुझे क्यों आ रही है, बहुत सोचने पे ध्यान आया कि कुछ समय पहले मैने होटल बुकिंग साइट पे अपना ई मेल और रवि का मोबाइल नम्बर रजिस्टर किया था इसीलिए बुकिंग डीटेल मुझे आ रही थी। ओह तो क्या रवि किसी के साथ है मुझे झूठ कहा उन्होंने। दिमाग में बहुत सारे सवाल आ जा रहे थे तो खुद को सम्भाला और खुद को समझाने लगी नही नही रवि ऐसा नही कर सकते, पर दिल पे दिमाग हावी हो चला था तो कांपते हाथों से होटल बुकिंग मे दिये नम्बर पे काल लगा दी साथ ही ईश्वर से प्रार्थना कर रही थी की काश जो मै जो सोच रही हूं वैसा ना हो। उधर से जब काल पिक हुई तो रिसेप्शन से कोई आदमी बोल रहा था , हिम्मत जुटाते हुए पुछा क्या रवि जी के नाम की बुकिंग हुई है आपके होटल में, वो बोला हाँ जी हुई है तकनीकी कमी के कारण साइट से तो बुकिंग हो गयी पर हमारे पास रूम खाली नही है तो उनकी दुसरे होटल में सिफ्टींग करा रहे है। सुनके लगा जैसे सब कुछ सपना चल रहा हो कुछ भी महसूस होना बंद हो गया उसी हालत मे दुसरी होटल बुकिंग के नम्बर पे काल लगाया, वही सवाल किया मीरा ने फिर से "क्या आपके होटल मे रवि वर्मा जी की बुकिंग हुई है जवाब आया हाँ जी हुई है वो आए थे यहाँ पर हम उंहे रूम नही दे पाए कयोंकि उनके साथ जो मैम थे उन्होने अपना पहचान पत्र देने से मना कर दिया। घना सन्नाटा छा गया कुछ भी नही सुझा रहा था बस एक टक टकी लगाए सामने वाली दीवार को घुरती रही, कैसा असहनीय दर्द होता है जब कोई अपना ही हमें छलता है,
बेचैनी इतनी की मानो दिल सीने से निकल आएगा।
ऐसे कैसे कह दिया रवि ने की अब और साथ नहीं चल पाएंगे। रात भर जागते गीली आंखों को कब सुबह दीखी कुछ सयझ नहीं आया मीरा ने एक बार फिर से रवि को काल लगाई थी इस बार जब बात हुई तो सकपकाते हुए मीरा ने रवि से पूछा तुम होटल किसके साथ थे , हमारे बीच ऐसा कब क्या हुआ जो तुम्हें तो दिखा और मै नहीं देख पाई। की तुम मुझसे दुर हो गये।
रवि सब समझ चुका था, रवि का जवाब सुन मीरा को विश्वास ही नहीं हुआ और ना ही कभी ऐसा कुछ पहले कहा था रवि ने " बांझ हो तुम सात साल में अभी तक एक बच्चा नही पैदा कर पाई , मै तुम्हें और नही झेल पाउंगा। बेहतर होगा मेरे आने से पहले तुम चली जाना। मीरा सोचने लगी मुझे धोखा देके तुम मुझे ही कुसूरवार ढहरा रहे हो। तुम इसलिए ये नहीं चाहते कि तुम मुझे अब देखना नहीं चाहते, सच तो ये है तुम मुझसे नजर नही मिला पाओगे। इसलिए चाहते हो कि तुम्हारे आने से पहले मै चली जाऊं। तुम्हे तुम्हारीे नजर झुकते मै भी नहीं देख पाउंगी! अपनी गलती को छोटा करने के लिए रवि ने उसपे बांझ होने का इल्जाम लगा दिया।
सच ही तो था मीरा अपनी दुनिया में इतना खुश थी कि कभी इस तरफ ध्यान नहीं गया।
वो सब कूछ छोड़ चली जाना चाहती है घर में रखी हर चीज जैसे उसे बांध रही थी , पर अगले ही पल मानो अपना ही घर पराया सा लगने लगा।उसने अपना सामान उठाया और एक छोटा सा घर किराए पे ले वहाँ सिफ्ट हो गयीं। अगली सुबह शान्ति में चाय की चुस्कियां लेते उसने मा को काल लगाया सारी बात बताई तो माँ परेशान हो बोली, तो अगर बच्चा चाहिए तो उसका इलाज भी तो होता है, हां माँ होता है पर जब हम लोग शादी के बाद हनीमून से वापस लौट रहे थे हमारा एक अक्सिडेंट हो गया था। तो अक्सिडेंट में रवि ज्यादा जख्मी हो गये थे तब डाक्टर ने उनकी जान तो बचा ली थी पर कहा था रवि अब कभी बाप नहीं पाएगा, मैने रवि से ये.बात छुपाके रखी कि वो दुखी ना हो और डाक्टर को भी मना लिया था कि वो रवि से कुछ ना कहे। माँ बोली तो अब किराए के मकान में कैसे रहेगी अकेले , मीरा बोली माँ किराए का मकान तो पति का घर भी था वहाँ मै किराया घर के काम, रवि का ख्याल और उसे प्यार देके भरती थी और यहाँ मुझे पैसा देना होगा , पर एक फर्क होगा माँ ये वाला मकान मालिक घर से निकालने से पहले एक महीने की मोहलत तो देगा। एक महीने की मोहलत तो देगा।
By Kanchan Deora

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