कितना रोशन सा लगने लगा है
By Rathod Aakash
कितना रोशन सा लगने लगा है
कितना रोशन सा लगने लगा है समा मुझे,
जैसे अमावस की रात में दिखा हो चांद मुझे,
तुम बिलकुल वैसी हो जैसी मेरे ख्वाबों में थी,
उन सारे ख़्वाबों पर होने लगा है ऐतबार मुझे।
मंजिल तुम हो मेरी, सफर कठिन है बड़ा,
तेल अपनी हर मंजिल का रास्ता बनालो मुझे।
कोई वादा नहीं फिर भी इंतजार तुम्हारा किया,
उस इंतजार में गुजरा हुआ वक्त बनालो मुझे।
जहां चाहकर भी तुम मुझसे जुदा न हो सको,
ऐसी मोहब्बत का कोई रिवाज बनालो मुझे।
फ़िज़ाओं में मेरी मौजुदागी महसूस करती रहो,
अपनी सासों में बसी हुई वो खुशबू बनालो मुझे।
By Rathod Aakash

Comments