काश मैं
By Mridul Krishna Tripathi
पहले सोचता था,
काश मैं चाय होता
ठंड में तूने मुझे होठों पर लगाए होता।
फिर सोचा, मैं कश्मीरी कावा होता
तूने शौख में मुझे चाहा होता।
पर अब सिर्फ यही इच्छा है
कि तेरे so called addiction का मैं सहारा बनूं
और black coffee के रूप में तुझे संभाला करूं।।
By Mridul Krishna Tripathi

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