काश एक ऐसा दस्तूर आये
Updated: Aug 2, 2025
By Kavita Batra

काश एक ऐसा दस्तूर आये,
तू मेरे पास और ,
ज़माने से दूर नज़र आये।
तू मेरे किस्से में नहीं,
तू मेरे हिस्से में आये।
वो मांगने से जो पल मिलते हें ,
वो बिन बोले मेरे हक के राज़ी में आये ।
वैसे तो बहुत बातें होती हैं,
तेरी मेरी मुलाकातों में,
कभी ऐसा भी हो ,
कि कुछ ख़ामोशी के सुकून के पल ,
हमारे दरमियान आये ।
By Kavita Batra

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