कारवां
By Vijay Kumar Nagar
गमों का कारवां है जिंदगी. गुम हैं साथ चलने वाले
सभी को नहीं मिलते. राहत के मक़ाम जानने वाले.
गमों की तपिश है. ज़िन्दगी के तवील सफ़र में
बड़ी क़िस्मत से मिलते हैं सफ़र में खुशियाँ देनेवाले.
मिल भी जाए गुजरते काफिले. गर सफ़र तन्हा में
साथ साथ चलते हैं जान ओ माल लूटने वाले..
जरूरी तो नहीं हर कोई. मिज़ाजपुर्सी आप की करें
दुआ देने वालों से ज़्यादा है. साथ में कोसने वाले.
शायद ही कोई खुश होता है. देखकर किसी की खुशी
हम सफ़र हैं बात-बात पर. मरसिया पढ़ने वाले.
होगा कोई जांबाज. तलाशेगा रास्ते नए जीने के
दिखते हैं हर तरफ़ मुझे. पगडंडियों पर चलने वाले.
हर बार कर लेता हूँ. पहेली-सी मुहब्बत में यकीन
मुझे भी अज़ीज़ है. मुहब्बत में धोखा देने वाले.
चिकने चुपड़े रास्ते. जवानी के छोटे और तन्हा हैं
फिक्र जान की नहीं. हर क़दम पर हैं बरगलाने वाले.
जमाना हुआ नादिर. शिकवा करूँ किससे
ख़ामोशी मात खाती है. जीत जाते हैं बोलने वाले.
पूछेगा कोई ऊपर मुझसे. जन्नत नशीनी का सबब
चर्चा बहुत हैं नीचे यहाँ सामान ऐश के मिलने वाले.
रब से गुजारिश है. दो चार जहाँ और भी बना दे
आबाद हो जहाँ सिर्फ. गमों से भागने वाले.
रब झूठ ना बुलवाए मुझसे. मुहब्बत के बारे में
फना होने वालों से ज़्यादा हैं. फायदा उठाने वाले.
वफा परस्ती उनकी. सिर्फ उनके इर्द गिर्द रहती है
बमुश्किल मिलते हैं. दूसरों का ख़्याल करने वाले.
भूल गया आते ही. फानी दुनिया के ऐशों आराम मैं
कौन-सी मंजिल? कैसे हैं. सफ़र में साथ चलने वाले.
मुल्क ए रब से चला था. याद था. मुझे मंज़िल का पता
राह जनी कर ले गए रुक्का. महकते रुमाल रखने वाले.
रुखसत किया रब ने. पता लिखी तक़दीर दी थी
हैं कामयाब बदलने में? तदबीर की क़लम से लिखने वाले.
साथ रूमानी हो तो. हर क़दम पर राहों में फूल खिलते हैं
सियासती चाल चलते हैं. गुलों में फूट डालने वाले.
क्या बढ़ती नजदीकियाँ ही. ताल्लुकात का सबब है?
मतलब मुहब्बत का बताएंगे. एक दूजे पर मरने वाले.
बस इतनी-सी चाहत है. गुल रखें वह पसे मर्ग पर मेरे
दे गए कुछ फूल आँखों से. मुझ से आँखें चुराने वाले.
खार करते हैं फरियाद. चमन में बदनाम होने की
गुलों को हैं यकीन. ख़ार हैं हिफाज़त करने वाले.
हर कोई खुश होता है देखकर खूबसूरती फूलों की
गुलों से पूछो. कांटे ही तो हैं हुस्न बचाने वाले.
बच बच कर चलना साहिब ज़िन्दगी के झमेलों से
यहाँ तो हर मोड पर मिलते हैं. रुकावट डालने वाले.
खौफ नहीं है किसी को आज. जहन्नुम जाने का
गुरु सारे आम मिलते हैं. सीट जन्नत की बाँटने वाले.
कुछ नया मत करना ज़माने में लीक से हटकर
मुस्तैद हैं पड़ोस में तेरे. खिल्ली उड़ाने वाले.
भिखमँगों की भीड़ लगती है. तेरे दर पर रोज़ या रब
कुछ हैं कैश मांगने वाले. कुछ ऐश चाहने वाले.
बेवफा करें भी गर वादा. लौट कर वापस आने का
नाम वफ़ा से पूछेंगे. वफ़ा की राह जाने वाले.
शख़्स कोई चाहिए उनको. तोहमत क़त्ल का धरने को
हाजिर है 'नाकाम' कहाँ हैं गर्दन पर छुरी रखने वाले.
By Vijay Kumar Nagar

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