कहानी
By Shivani Jadhav
अपनी कहानी लिख रहा था
अपनी जुबानी लिख रहा था.....
जिक्र उनका बस हुआ ही था
वही कागज,
वही कलम,
वही नाम,
लिख कर रोज मिटा रहा था
अपनी कहानी लिख रहा था
अपनी जुबानी लिख रहा था......
मेरे मन की दशा वो भांप गयी थी
मुझे यूँ बिखरता देख,
कागज की आत्मा सिसक उठी......
कलम ने भी आज साथ छोड़ा था
दर्द उस पल का,
बयां वो कर न सका था
अपनी कहानी लिख रहा था
अपनी जुबानी लिख रहा था......
मेरे ह्रदय का ताप, मेरे आंसू बनकर बह गए थे
उस नाम की गहराई से उबार न सका था
कहानी पूरी कर ना सका था.....
अपनी कहानी लिख रहा था
अपनी जुबानी लिख रहा था.........
By Shivani Jadhav

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