कहाँ खड़े हो तुम।
By Ajeet Singh
जब मैं सबसे ऊपर खड़ा था
तो मैंने देखा था हर किसी को
अपनों के ऊपर खड़े हुए
हाथों में खून से सने कटार पकड़े हुए
मैंने देखा था कहीं बादल थे
कहीं नहीं थे
वहाँ सभी बस चुप थे
कोई नहीं कह रहा था
की वो जहां थे
क्या वो हमेशा वहीं खड़े थे
भीड़ थी और भीड़ में सब लाल आँखें लिए
बस ऊपर से बरसते खून में खड़े थे
मैंने देखा अपने हाथों में रुक गए लाल रंग को
जो उनका था जो मुझे धकेल सकते थे
वहाँ जहां लाल आँखें लिए भीड़ थी
मैंने देखा अपने अंदर भी
और मिला उन सबसे जो कह रहे थे
धिक्कार है तुझ पर
तू वहाँ खड़ा है जहां बस रक्त की लकीरें हैं
मैं फिर भी ऊपर खड़ा रहा
पर शायद अब ऊपर सब से नीचे था
मैं भी वहीं खड़ा था
By Ajeet Singh

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