कहना तो नहीं था पर कहने लगा हूँ
- Hashtag Kalakar
- Apr 19, 2024
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Updated: Jul 19, 2025
By Shriram Bharti

कहना तो नहीं था पर कहने लगा हूँ
दरिया में नाव बन बहने लगा हूँ
तुम्हे भनक तक नहीं मेरे आए गए की
घरों को छोड़ उलझनों में रहने लगा हूँ
आज पेड़ उगता देख मुझे बीज याद आया
मैं फलों को देख मचलने लगा हूँ
लबालब भरा हूँ गलतियों से अपनी
मैं ठहरे बादल सा बरसने लगा हूँ
वो लेने आए हैं आनंद छाँव का
मैं पत्ती बन शाखों से झड़ने लगा हूँ
इस धूप में मुझे कोई पानी पिला दे कि
गमले में खड़े खड़े कुम्हलने लगा हूँ
बहुत काँटे उखाड़े हैं तलुवे से
अब राह निहार कर चलने लगा हूँ
धूल सा था, कीचड़ हुआ बारिश में
तलवे के नीचे आया तो पिछकने लगा हूँ
मेरी सांसे रुक जाए तो ऐतराज़ नहीं
सांसे रोक देंगे कहा तो ऐतराज़ करने लगा हूँ
बहुत घमंड था मुझे मेरे होने का
मैं जीते जी बस अब मरने लगा हूँ
बहुत रोका मुझे इन तूफानों ने
मैं बंदिशों के कारण उबलने लगा हूँ
मैं जतन करता हूँ मेरी बात सुनाने का
आए दिन अंगार उगलने लगा हूँ
मेरा मोहल्ला खाली है, कोई मुझसा भेजो
लोग कहते हैं कि मैं बदलने लगा हूँ
मैंने पढ़ीं है किताबें भी बहुत
अब पुस्तकें छोड़ चेहरे पढ़ने लगा हूँ।
By Shriram Bharti

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