कहना उसे
- Hashtag Kalakar
- May 24, 2024
- 1 min read
Updated: Oct 4, 2024
By Gautam Anand
जो मिले कभी तो कहना उसे
कि अब ज़िन्दगी का
कोई ऐतबार नहीं
एक अकुलाहट एक बेचैनी है
जो बड़ी बेतरतीबी से
धड़कनों में समाई जाती है.....
कहना उसे
इन दिनों मैं लिख रहा हूँ
उदास कविताएं
पढ़ रहा हूँ
उसकी डायरी के पन्ने
और उसकी चिट्ठियाँ
सुन रहा हूँ
उदास गीत
और उसकी बीती हुई आवाज़ें
कहना उसे
अब इस क्षण
बस मैं समेट लेना चाहता हूँ
उसकी सारी चिट्ठियाँ और उसपर पड़े
उसके होठों के हस्ताक्षर,
उसके शब्द, उसका नाम,
उसकी आवाज़ें, उसकी बातें,
मुझे प्रेम करती हुई उसकी तस्वीरें
उससे जुड़ा हुआ
सबकुछ जो मेरे सामने हैं
सोचता हूँ ऐसा कोई विज्ञान नहीं
कि सब घोल कर पी जाऊँ
और धमनियों में प्रवाहित हो जाये
उसकी तस्वीरें, उसकी चिट्ठियाँ, उसकी आवाज़ें
क्यूँकि कहीं और प्रवाहित कर
मैं इससे मुक्त होना नहीं चाहता
यक़ीनी तौर पर तो मालूम नहीं
लेकिन अब भी
ज़ब कभी
मेरी आँखें नम होती हैं
तो भरोसा होता है
उसने याद किया होगा
कहना उसे
एक जिस्म है मेरे नाम का
इस दुनिया की भीड़ में
जो न हँसता है न रोता है
न थकता है न रुकता है
बस चलता ही जाता है अनवरत
ज़िन्दगी का बोझ लिए हुए
दो आँखें हैं
उसके ख़्वाब लिए हुए
ख़्वाब जो पत्थर हो गई हैं
और बाट जोह रही हैं
अहिल्या की तरह
कि तुम, कभी आओ न आओ तुम्हारी मर्ज़ी
पर एक बार मेरा नाम ही पुकार लो
भेज दो अपनी आवाज़
जो राम की तरह स्पर्श करे मेरे मन को
कि ग़ुबार है कई वर्षों का
जो बेसब्र है पिघलने को
और ढूंढता है एक अदद कन्धा...
By Gautam Anand

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