कहते हो
By Saksham Chandola
कहते हो ज़िन्दगी जी है तुमने,
फिर क्यों है इतनी बेताबी तुम्हें?
दौलत में बेहिसाब घिरे तो हो,
पर लगता मिली नहीं कामयाबी तुम्हें।
अपनी गलत रवि को मानकर सही,
आज दिख रही हर ख़राबी तुम्हें..
एहसास का भंवर जब आया तुम पर,
आख़िर बना दिया ना, शराबी तुम्हें?
बनाकर ख़ुदा इस मादा-परस्ती को,
क्या मिल गई ज़िन्दगी गुलाबी तुम्हें?
शोहरत और औरत भी बहुतायत हैं,
तसल्ली कहाँ मिली वहाँ भी तुम्हें?
ऊपरी चीज़ें पाकर न होते हम सक्षम,
गुमराह करती दुनिया कहकर नवाबी तुम्हें!
By Saksham Chandola

Beautiful lines keep it up...
From K Chamoli
❤️
Very true and well written. Bahyachha aur bahut khoobsurati se likha hai . Anulekha Basu
Jeevan ka saar is poetry me likh diya janab
Jeevan ka saar apne is poetry me likh diya janab