कश्मकश
By Agrima Bajpai
हम बड़े तनहा थे,
अपनों के लिए फना थे,
जिंदगी ने दस्तक दिया,
खिलखिलाकर नत्मस्तक किया।
पूछती है वो हमसे,
जनाब जिएंगे आप कबसे,
क्योंकि ये हँसी तो छलावा है,
दूसरों के लिए एक दिखावा है।
उलझ गए हम इन सवालों में,
खो गए हम अपने खयालों में,
खुश थे कब हम आखिरी दफ़ा,
जिंदगी न जाने कब हो गई हमसे खफ़ा।
बचपन के थे वो आखिरी लम्हे,
जब जीते थे हम हर समय,
जवानी ने वो चुरा लिया,
हमने खुद को भुला दिया।
श्राप ही तो है ऐसी समझदारी,
जो फंसा दे हमे इन दुनियादारी,
भूले-भटके हम चलते रहें,
ख़ुदमें ही उलझते रहें।
इसलिए जिंदगी से हमनें कहा,
हुज़ूर खड़े क्यों हैं आप वहां,
हमे गले से लगा लीजिए,
खुश रहना सिखा दीजिए।
By Agrima Bajpai

Beautiful
Extremely well expressed 💯
What wonderful expression of thoughts in such a short warming poem. I loved it😘😘
🫶🫶
Nice