कश्मकश
By TanuShree Patwa
जाने कैसी कश्मकश है ये,
क्या - क्या बिखर रहा है, इसका अहसास है ये,
दिमाग जानता है पर दिल नासमझ है ये,
जाने कैसी कश्मकश है ये।
रूह फँसी है उनके जाल मे जो ये,
नादान कैद परिंदा सा ये,
जाने - ना - जाने बिल्कुल नासमझ है ये,
जाने कैसी कश्मकश है ये।
उनके झूठे वादे से ये,
दिल मान बैठा सच जो ये,
अब उठ गया हर झूठ से पर्दा जो ये,
जाने कैसी कश्मकश है ये।
मानना पड़ेगा की सच है ये,
कही ना कही धोख़ा है ये,
उलझ चुके है दिल - दिमाग ये,
जाने कैसी कश्मकश है ये।
लगा नही था खत्म होगा ये,
दिल के जो हज़ार टुकड़े करेगा ये,
मानो सब कुछ खत्म कर जायेगा ये,
समझ के परे है ये,
जाने कैसी कश्मकश है ये।
By TanuShree Patwa

Comments