कश्मकश
By Mayank Joshi
एक मैं था, एक वोह थी ओर बात खामोशी की है,
दिल को मिले सुकून और बेकारारी की है,
मिलकर, क्या बोले ? क्या ना बोले ?
क्योँ की, कश्मकश आज, पेहली मुलाकात की है।
बात, आज, एक नए रिश्ते की है,
दिल मे जगे, नए जज़्बातोँ की है,
अदब~ए~वफ़ा का मतलब हम केसे समझे ?
क्योँ की, कश्मकश, आज पेहले अल्फाज़ की है।
थम जाउँ मैं, यहीं, बात, आज, ज़रा कयामत की है,
असल मे तो बात, किसिके, मुस्कुराहट की है,
हाल और खयाल आखिर खो ही गए,
क्योँ की, कश्मकश, आज, प्यार_वफ़ा के, ऐतबार की है।
कश्मकश आज, प्यार के पेहले मुलाकात की है,
कश्मकश आज, प्यार के पेहले दिदार की है,
कुछ इस तरह से गुज़री है, इश्क़ की हवा मुझे छु कर,
की कश्मकश आज, प्यार के पेहले एहसास की है।
"सिलसिला चाहत का कुछ यूँ हो गया,
पेहली मुलाकात मे, प्यार का एहसास हो गया,
कैसे समझाय, फ़साना इस दिल का,
एक अजनबी सा शख्स, दिल~ए~खास हो गया।"
By Mayank Joshi

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