कश्ती
By Dr. Amit Tanajirao Suryawanshi
कश्ती से प्यार हमें भी था, जो भागते थे उसके पिछे,
भागना अब भी जारी है, सिर्फ कागज़ बदल गये है.
मुस्कुराते थे तब भी जब हाथ मे खिलोने के सिवा कुछ न था
बहोत महेंगा पडा हमें बडा होना,
अब हर फिकर मे बेपर्वाही
और हर हसी मे बचपना ढूंढते फिरते है |
By Dr. Amit Tanajirao Suryawanshi

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