कल्पना से ऊपर
By Suman Rai
केवल कल्पना ही कवि की मत बन जाना तुम,
धीर धरा गंभीर हो , सर्वत्र प्रकाश दिखाना तुम
संबंधों में उलझा जीवन, दायित्व बोध में खो जाएगा
मोह क्षोभ से लिप्त हुए जब, जीवन त्रस्त हो जायेगा
राजकुमार जो सपने का है , तराश उसे ख़ास बनाना तुम
केवल कल्पना ही कवि की मत बन जाना तुम।
रीत खोखली रूढ़ी परम्परायें रहेंगी,
अतीत की तहज़ीब और झूठी कल्पनायें रहेंगी,
समय सापेक्ष व्यवहार कुशलता का संदेश फैलाना तुम
केवल कल्पना ही कवि की मत बन जाना तुम।
क़िस्मत को सँभालने का हुनर होना चाहिये
वैध वांछित जायज़ की जगह होनी चाहिये
दूसरों की शर्तों पर नहीं, ख़ुद की स्पष्टता से ख़्वाब सजाना तुम
केवल कल्पना ही कवि की मत बन जाना तुम |
By Suman Rai

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