कलपनाओ से परे....
By Bithika Das
कल्पनाओं से परे एक जहां है मेरा,
कभी तितली बन उड़ जाऊं!!
कभी झरने सी बह जाऊं,
कभी पहाड़ो सी दृढ़!!
कभी पेड़ो के संग लहराऊं,
कभी मिट्टी की सोंधी खुशबू बन जाऊं!!
कभी रात का तारा बन जाऊं,
सफर बहुत लंबा है ख्वाबों की दुनिया का....
By Bithika Das

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