कल हो ना हो
Updated: Jan 27, 2024
By Priyanka Mathur
तो क्यों ना गुफ्तगू की जाये खुद से
और टटोला जाये उन ख़्वाहिशों को
जिसे बन्द कर रखा है एक ऐसे सन्दूक में
जिसका नाम है कल..!!
परन्तु बंधु ये जान लो कि
कोई अगर मगर नहीं करना
जो कल मिल जाये तो जकड़ कर रखना
बड़ा हठी होता है ये कल
बदलने में लेता नहीं है पल..!!
ख़्वाहिशें भरी हुई है खज़ाने सी
सोचा था बड़ी हो जाऊँ तो
पूरी कर लूँगी हर तमन्ना
भला कौन है जो मुझे रोके टोकेगा
सुन वक्त, क्या तू थोड़ा रूकेगा..!!
बोला क्यूँ रूकूँ मैं तुम्हारे लिए
तुम्हें आज नहीं कल चाहिए..
खोल दो वो ख़्वाहिश वाला सन्दूक
थाम कर आज के लम्हों की बन्दूक
कल हो ना हो इससे क्या फर्क पड़ता है
वक्त उसी का होता है जो आज में जीता है..!!🍁
By Priyanka Mathur

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