कल रात मेरे सपने में
- Hashtag Kalakar
- Dec 12, 2025
- 2 min read
By Anjali Kumari
कल रात मेरे सपने में एक लड़की आई,
काजल फैला, बाल खुले, आँखों में आँसू,
होंठों पर चुप्पी, और दिल में दर्द समाये,
कल रात मेरे सपने में एक लड़की आई।
उसके बाल उसके चेहरे को ढके हुए थे,
सो, मैं उसका चेहरा देख न पाया।
बाल हटाए, चेहरा देखा, डर गया,
मैं कुछ समझ न पाया।
ये तो वही लड़की है,
जिसकी इज्ज़त कल रात मेरे सामने लूटी गई थी,
इसकी चीखें मेरे कानों में गूँज रही थी,
यह लड़की मेरे सामने मारी गई थी।
मैं चुप-चाप खड़ा देख रहा था,
क्योंकि डरा हुआ मैं भी था।
वो आदमी शहर का गुंडा था,
हर लड़की पर उसकी नज़र बुरी थी;
मैं चाह कर भी उसे रोक न पाया,
क्योंकि मेरे घर भी तीन लड़की बड़ी थी।
मैं उसे समझाने लगा-
मैं बुरा इंसान नहीं हूँ।
मैं भी लड़कियों की इज्ज़त करता हूँ।
पर उस वक़्त तुम्हें बचा न पाया,
क्योंकि बहनों को खोने से डरता हूँ।
वो लड़की मेरे सपनों में कह गई-
वहाँ खड़े-खड़े मुझे मरता देखते रहे,
फिर भी सफ़ाई देते हो ?
किसी और की बहन की इज्ज़त लुटते देख चुप रहे,
फिर भी ख़ुद को भाई कहते हो ?
अपनी उन तीन बहनों के लिए
मुझे रोता देखते रहे,
मेरी चीखे सुनते रहे,
मुझे मरते देखते रहे ..
अगर सब तुम्हारी तरह हो जाएँ,
तो सोचो क्या हो जाएगा,
कन्या भ्रूण हत्या, तुम्हें नहीं लगता,
फिर शुरू हो जाएगा ?
कन्या भ्रूण हत्या को ग़लत कहते हो,
और ख़ुद को पढ़े-लिखे समझते हो,
इक लड़की को सामने मरता देखना,
उसे क्या कहते हो ?
बचपन से प्रतिज्ञा लेते हो,
"हम सब भारतवासी भाई-बहन हैं"
कहाँ चली जाती है ये प्रतिज्ञा,
जब उस रिश्ते को निभाने की बारी आती है ?
अरे सीधे-सीधे बोल दो न! डरते हो तुम,
बहनों का सहारा क्यों लेते हो ?
जब रिश्तों की अहमियत नहीं समझते,
तो प्रतिज्ञा क्यों लेते हो ?
By Anjali Kumari

अत्यंत सुंदर रचना
A bold poem that forces uncomfortable but necessary questions
बहुत खूब
Impressive 👍
❤️❤️