कर्त्तव्य पथ
Updated: Jul 21, 2025
By Dr. Amit Prakash
अवरुद्ध हूँ, प्रबुद्ध हूँ,
मैं हार के विरुद्ध हूँ,
बढ़ा चला, मैं अग्रसर,
मैं प्रयास का स्वरुप हूँ;
तमस में रुका नहीं,
मैं रौशनी हूँ, धूप हूँ,
प्यास मेरी क्या बुझी?
मैं बारिशें, मैं कूप हूँ;
मैं हूँ यहीं पे लड़ रहा,
के भीड़ में विलूप हूँ,
शोर में खड़ा हुआ,
मैं अनसुना सा…, मूक हूँ;
हैं ये सभी शिखर मेरे,
मैं मानता अटूट हूँ,
मैं चल रहा हूँ, या नहीं !
मैं सत्य हूँ, या झूट हूँ ?
कौन है जो कह सका ?
मैं वक़्त से अछूत हूँ,
वो, वही बताएगा,
मैं हूँ, या बावजूद हूँ;
के जीत बिना,
परास्त नहीं,
मैं इक प्यासा-सा कूप हूँ,
मैं जल रहा, विभूत हूँ,
मैं जल रहा; विभूत हूँ…||
By Dr. Amit Prakash

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