कर्ज़दार
By Sheikh Wasim Mustafa (Sheikh Sahab 007)
ये तोहमतें न लगाओ की हम कुसुरवार हैं,
अपनो ने सब लूट लिया, हम आज भी कर्ज़दार हैं
यूं हल्का सा कुछ मेहसूस हुआ है,
लग रहा है कोई अपना लौटा हुआ है
जा कर देखा तो कोई और न था,
ये वही लुटेरा है जो यहां ठहरा हुआ है
कुछ मांगू उससे तो क्या मांगू,
वो सब लूट कर भी कर्ज़दार है
अब धीरे धीरे गलतियां सुधार रही उसकी
वो अच्छा तो है पर कर्ज़दार है ।
By Sheikh Wasim Mustafa (Sheikh Sahab 007)

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