कमाल करता हूं (Kamaal Karta Hun)
By Sameer Agarwal
गई है जब से तू छोड़कर सफर में,
ना चाहूं देखना तुझको जिंदगी की डगर में,
फिर क्यों मैं हर रोज तेरी गली से गुजरता हूं,
जब खुद से ये सवाल करता हूं, मैं कमाल करता हूं।
तेरे नाज़ उठाने को अपनी हर खुशी वार बैठा था,
तेरी एक हंसी की आस में जिंदगी हार बैठा था,
पर हर दुआ में अब भी क्यों तेरा ख्याल करता हूं,
जब खुद से ये सवाल करता हूं, मैं कमाल करता हूं।
तुझको भुला कर आगे बढ़ चुका हूं अब मैं,
तेरी यादों से जाना बहुत लड़ चुका हूं अब मैं,
पर अब भी क्यों तेरे आंसुओं पर मैं बवाल करता हूं,
जब खुद से ये सवाल करता हूं, मैं कमाल करता हूं।
मेरे दर्द पर हरदम तू हंसता रहा उम्र भर,
मैं करता रहा जाना तेरा इंतजार मगर,
अब भी क्यों मैं तुझसे इश्क बेमिसाल करता हूं,
जब खुद से यह सवाल करता हूं, मैं कमाल करता हूं।
By Sameer Agarwal

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