कम नहीं हूँ
By Sarthak Shankar Chaturvedi
अब जो कुछ हूँ, वो कम नहीं है,
टूटा हूँ - मगर ख़म नहीं है।
मैं बर्बाद सही, मगर ज़िंदा हूँ,
ज़हर पिया है, पर ग़म नहीं है।
बिखरा हूँ कई सौ ख़्वाबों सा,
लेकिन कुछ कम नहीं है।
शोलों से दोस्ती है मेरी,
अब आँधियों से डर नहीं है।
जला हूँ अपने ही अंधेरों में,
मगर किसी का करम नहीं है।
मैं अपनी मौत का ऐलान हूँ
मुझे किसी की दुआ का भरम नहीं है।
तन्हा हूँ तो क्या ग़म है मुझे,
मैं साए से भी बढ़कर हूँ।
जो हार गया था ख़ुद से ही,
अब जीत गया मुक़द्दर हूँ।
By Sarthak Shankar Chaturvedi

Ati sundar
Kya khoob likha hai
✨✨
Amazing
Nice poem