कभी कभी
By Alka Singh
तुमसे बिछड़कर आज भी जीते तो हैं मगर
दिल की धड़कन रुक सी जाती है,
कभी कभी ।
तपती हुई गर्मी में बादल की मानिंद
मन करता है कि वो दिख जाएं,
कभी कभी |
ये पतझड़ का है मौसम या दिल उदास है
काश बन के बदली बरस जाएं वो
कभी कभी ।
खाली रास्तों पर दिल करता है उम्मीद
कि दिख जाए बस उनकी एक झलक
कभी कभी।
By Alka Singh

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