कपिल देव : एक मिसाल
By Krunal Raj
भारत की स्वर्ण धरती पर,हमने हीरा पाया है,
उन्होंने अपने खून पसीने से, माटी का कर्ज चुकाया है,
उनके आने से पहले, भारत में क्रिकेट अनजान था,
विश्वकप की अंक सूची में, हमारा अंतिम स्थान था,
चंडीगढ़ से बच्चा आया, नाम उन्होंने कपिल पाया,
घोर तपस्या करके उन्होंने, बाजुओं को मजबूत बनाया,
24 साल की उम्र में ही, वर्ल्ड कप को जीत लिया,
हर देशवासी के भीतर, क्रिकेट को नया स्थान दिया,
वह कपिल, जो भारत की शान है,
वह कपिल, जो भारतीयों का मान है,
वह कपिल, जिनकी गेंदों को हरिफ नहीं खेल पाते थे,
वह कपिल, जिनके बल्ले से चौके और छक्के जाते थे,
वह कपिल, जिनके आने से अंबर तक फट गया था,
वह कपिल, जिनकी मेहनत से वर्ल्ड कप मिल गया था,
वेस्टइंडीज की टीम को देखकर, पूरा विश्व विचलित था,
उनके गेंदबाजों से, पूरा जग परिचित था,
मार्शल-होल्डिंग नाम सुन, सारे लोग हिल जाते थे,
बल्ला होता भले हाथों में, बल्लेबाज गिर जाते थे,
रिचर्ड्स-क्लाइव की जोड़ी पर, उनको पूरा मान था,
दो बार वर्ल्ड कप था जीता, इसलिए थोड़ा अभिमान था,
वेस्टइंडीज की ताकत को, भलीभांति जान गए,
मैच से पहले लगा मानो, मन से भारत हार गए,
ऐसी विषम परिस्थिति में, पंजाबी लड़का खड़ा हुआ,
परेशानियों के भीतर, बचपन से ही पला हुआ,
केप अंग्रेजी को थोड़ा-थोड़ा बोलता था,
मैच की सारी रणनीति को, मन ही मन बुनता था,
कपिल देव टीम को लिए, लोडस में आगे बढ़ रहे थे,
ऐसा दृश्य देखा मानो देवसेना संघ, भगवान कार्तिकेय चल रहे थे,
बल्ले गेंद के टकराने से, ध्वनि गूंजती थी टन टन,
गेंद रोसन की सीने पर , दस्तक देती थी सनन सनन
सनन सनन से और भयानक, हो उठती थी मंद पवन,
मंद पवन में बल्लेबाज की, विकेट उड़ती खनन खनन,
मस्तक पर गेंद के टकराने से खून निकलता, धनन धनन,
धनन धनन घनघोर घटा देख, फिल्डर गेंद की ओर बढ़े,
सारे दर्शक मैच को मानो, देख रहे थे खड़े खड़े ,
टॉस जीतकर जिंबाब्वे ने, गेंदबाजी का चयन किया,
शुरुआती ओवर में लगा, जीत का उन्होंने वरण किया,
गावस्कर, श्रीकांत, अमरनाथ ,पाटिल नो ही रन कर पाए,
यशपाल शर्मा बाद में आकर सत्रह तक ही जा पाए ,
कपिल ने देखा, मन में सोचा,
जिंबाब्वे को मनमानी नहीं करने दूंगा,
भले कुछ भी हो जाए, भारत को ऐसे हारने नहीं दूंगा ,
सामने आती गेंद को देखकर ,एक पैर उठा लिया,
पूरी जोर से गेंद को, मिडविकेट पर पुल किया,
कपिल की वह मुद्रा मानो नटराज से मिलती थी,
एक सो पचत्तर स्कोर करके जीत, जिंबाब्वे से छीनी थी,
आप पदम श्री, आप अर्जुन, आप पदमभूषण हो,
आप क्रिकेट के भगवान की प्रेरणा, आप स्वयं विभूषण हो,
आप युवा के आदर्श, जीवन करते उजागर हो,
सरल, सलिल, सुंदर , सरिता, और समन्वित सागर हो।
By Krunal Raj

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