"कदमों के निशान"
- Hashtag Kalakar
- May 25, 2024
- 1 min read
Updated: Oct 4, 2024
By Rashmi Dadhich
लो चल पड़े कदम यहां वहां निशान छोड़ते,
चूमती लहू जमीं वो बेड़ियों को तोड़ते।
टपक - टपक- टपक - टपक,
लो स्वर्ण बूंद गिर रही,
शूल बन रहे हैं फूल,
राह तेरी खिल रही।
है धन्य तेरी वीरता,
तू पत्थरों को चीरता।
हार को हरा के हार का गुरूर तोड़ते।
चल पड़े कदम यहां वहां……
धदक - धदक - धदक - धदक,
लोअग्निकुंड जल रहा,
जिस्म ये पिघल रहा,
कठोर शस्त्र ढल रहा।
क्रोध को प्रचंड कर,
शत्रुओं को दंड कर।
वारकर, प्रहार कर, जो बीच राह रोकते।
चल पड़े कदम यहां….
धमक - धमक - धमक - धमक,
है बढ रहे तेरे कदम।
सो रही है मंजिले,
धमक तेरी जगा रही।
देख तेरे होंसले,
सभी,के होश गुम हुए।
वो देख बाहें खोल,
तुझको मंजिलें बुला रही।
नई जगह, नई डगर, नए सफर, को खोजते।
लो चल पड़े….
By Rashmi Dadhich

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