ऐसा क्या है तेरे मन में?
By Akansha Ashok
कितना शोर है इन बाज़ारों में!
कितना शोर है इन गलियों में!
क्यों तू अपनी क़लम लेकर बैठा है,
फिर एक ग़ज़ल लिखने,
फिर उस किताब के पन्नों पर, तू लिखना क्या चाहता है?
ऐसा क्या है तेरे दिल में?
सवालों भरे तेरे मन में,
एक स्याही शायद जवाब लिख रही है,
फिर क्यों तू आसमान देखता है?
ऐसा क्या है इन सितारों में?
ऐसा क्या है तेरे मन में?
By Akansha Ashok

Loved it