ऐ मेरे हमसफर
By Sunil Kumar Shukla
ऐ मेरे हमसफ़र साथ तेरा है ग़र,
हर सफ़र अपना आसान हो जाएगा !
वक़्त है कुछ ख़फा सा जो मुझसे मेरा,
है भरोसा मेहरबान हो जाएगा !!
ऐ मेरे हमसफ़र....!
चाँद भी तूँ मेरा चाँदनी भी मेरी,
राग भी तूँ मेरा रागिनी भी मेरी !
हमक़दम बनके तूँ साथ चलती रहे,
वीरां मंज़र गुलिस्तान हो जाएगा !!
ऐ मेरे हमसफ़र......!
तूँ है धड़कन मेरी ज़िंदगानी है तूँ,
ख़ुश्क लम्हों की भीगी कहानी है तूँ !
साँस रुक जाएगी तुम जो बिछड़े अगर,
मौत का मेरे ऐलान हो जाएगा !!
ऐ मेरे हमसफ़र.......!
मेरी चाहत-इबादत की मूरत है तूँ,
ख़्वाब जैसी सजी ख़ूबसूरत है तूँ !
इस नज़ाकत नफ़ासत पे मचले है दिल,
आके पहलू में बेईमान हो जाएगा !!
ऐ मेरे हमसफ़र.......!
©सुनील
By Sunil Kumar Shukla

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