ऐ बंदे तू ना जाने
By Smita Chaudhary
ऐ बंदे तू ना जाने
रब का है तू खिलौना
उसने थी मुट्ठी खोली
कहा तुझको सीख जीना
तू आ गया जमीं पे
रही डोर उसके हाथों
जब चाहे डोर खींची
जब चाहा ढील दे दी
पर तूने क्या किया रे
मोह माया मे फंसा रे
ना खुश कभी रहा तू
खींच तान के ही जिया रे
पुराने हुए फिर धागे
खींची डोर दम लगा के
खिलौना गिरा जमीं पे
वो रूह ले गया उड़ा के ।
By Smita Chaudhary

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