ऐ देश मेरे
- Hashtag Kalakar
- May 23, 2024
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Updated: Oct 3, 2024
By Pushpa Karn
ऐ देश मेरेतझु पेयेजाँनि सार है
मस्तक पर तरेेशि शमकुुट - सा सरुभि त
हि मगि रि सि रमौर है
कल - कल करती वात्सल्यमयी नदि यांकरती धरा का श्रगंृ ार है
भारत पण्ुय भमिूमि हमारा , जहांप्रभुनेअवतार लि या
देवों नेभी इस माटी के रज सेति लक लगा शीश पर, अपना श्रगंृ ार कि या
तपोभमिूमि हैतूही, तूही मत्रं ोच्चार है
ऐ देश मेरेतझु पेयेजाँनि सार है।
भगत सि हं , आजाद, बोस की यही परि पाटी ,वही खनू हैवही हैगौरव वही बज्र की छाती
हंसतेहंसतेओढ़ ति रंगा शहीदों नेअपनी जान गवं ा दी
इस देश की वीरांगनाएंभी हैंअवतार शक्ति की
कर्मभर्म मिूमि है तूही, तूही जन गण का आधार है
ऐ देश मेरेतझु पेयेजाँनि सार है।
पर्वतर्व शि खर अभि मान हैअपना, हि न्द - महासागर अपनी शान है
तपोमयी, सि द्धमयी, करूणामयी भारत जननी अपनी , हम सबकी जान है
जन्मभमिूमि हैतूही, तूही पालनहार है
ऐ देश मेरेतझु पेयेजाँनि सार है।
By Pushpa Karn

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