ऐ खुदा
By Preethi Bansal
ऐ खुदा जरा दे तू मुझे बता,
क्या है नेकी करने वाले की खता,
जो उसे अच्छाई की भी मिल जाती है सजा,
पेड़ छाँव दे तो भी कट जाता,
नदी प्यास भुझाये फिर भी सड़ जाती,
खेर छोड़ लोग तो तुझे भी है भूल जाते,
जब जरुरते है उनकी पूरी हो जाती,
वक्त से पहले ना उनको भी तेरी याद आती,
खुद के स्वार्थ में यहाँ तो बेज़ुबान की भी बली चढ़ जाती,
न जाने किस उम्मीद पे तूने ये दुनिया बनादी,
जहाँ इंसान ने इंसान के नकाब में,
हैवानियत तेरी दुनिया में फैला दी !
By Preethi Bansal

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