एकांत
Updated: Aug 28, 2025
By Priyanka Dubey
"आज कुछ ज्यादा ही देर हो गयी थी घर लौटने में, समझ में नहीं आ रहा क्या करू? बाकी सब तो ठीक है पर बस स्टॉप से घर तक के रास्ते में जो सुनसान सड़क पड़ती है वहाँ क्या करुँगी ? अक्सर उस बदनाम सड़क पर कई वारदातें होती रही है " ; ये बात कब से उसे सताये जा रही थी; अगर घर के हालातों से मजबूर न होती तो कभी ऐसी नौकरी न करती जिससे घर लौटने में इतनी देरी हो.
हर तरफ नज़र दौड़ाई कि कही कोई जाना पहचाना चेहरा दिख जाए पर रात के इस समय सारे लोग या तो सो चुके होते है या टीवी देख रहे होते है, वैसे भी इतनी ठण्ड पड़ रही है और बिना किसी मजबूरी के कौन रहना चाहेगा इतनी देर घर से बाहर.
खैर कोई बात नहीं आज तो हिम्मत करना ही होगी, पर तभी सामने देखा कि कुछ बदमाशों का झुण्ड उसकी तरफ बढ़ रहा है, उसने पलटकर उलटी दिशा में चलना शुरू किया तो देखा सामने से मोहल्ले का सबसे बदनाम, बदमिज़ाज लड़का उसकी तरफ बढ़ रहा है.
यहाँ कुआं वहाँ खाई, जाएं तो जाएं कहाँ ?
यह क्या ! यह लड़का तो उसके बहुत करीब आ गया था और घबराहट के मारे ऐसी ठण्ड में भी हर्षा के माथे पर पसीने की बूंदें आ गयी.
"दीदी घबराइए नहीं मै आपको घर तक छोड़ दूंगा ", यह सुनते ही मानो हर्षा को अपने कानों पर विश्वास नहीं हुआ.
उसने फ़िर उसकी तरफ देखा जैसे पूछ रही हो कि क्या तुम मुझसे बात कर रहे हो? स्वाभाविक सी बात है यहां उसके अलावा और कोई लड़की तो थी नहीं .
हर्षा बिना कुछ सोचे समझे उस लड़के कि बाइक पर बैठ गयी, उसके मन में यही ख़्याल आ रहा था कि अनजाने भले इंसान से तो जाना पहचाना बदमाश भला, और अगर इस लड़के ने कुछ गड़बड़ करने कि कोशिश कि तो वो भी इसे देख लेगी.
अचानक से बाइक रुकी हर्षा फ़िर से घबराई, उस लड़के ने कहा- दीदी आप यहीं उतर जाइये, मोहल्ले में आपको कोई मेरे साथ इस तरह से बाइक पर बैठे हुए देखेगा तो आपकी बदनामी हो सकती है, चिंता मत करना मै धीरे धीरे पीछे पीछे बाइक लेकर चलता रहुगा, पर आपको सुरक्षित घर पहुँचाऊँगा.
हर्षा बिना कुछ बोले उतर गयी और घर कि तरफ चल पड़ी, आज उसे किसी कि कही हुई बात याद आ रही थी कि "मनुष्य का एकांत ही उसकी पहचान है ", और आज वो इस लड़के को बहुत अच्छे से पहचान गयी थी.
By Priyanka Dubey

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