एक ख़्वाहिश
By Sunil Kumar Shukla
हर गेह में अब नेह का व्यापार होना चाहिए ,
आदमी को आदमी से प्यार होना चाहिए !
मज़हबों की आड़ में सुलगी हैं जो चिंगारियाँ ,
कर रही जड़ खोखली नफ़रत की ये बीमारियां !
इस दहकती आग एवं रोग को पहचानकर ,
बन रहे नासूर का उपचार होना चाहिए !
आदमी को आदमी से प्यार होना चाहिए !!
है बिलखती सभ्यता और संस्कृति इस देश में ,
दम सा घुटता है यहाँ बदले हुए परिवेश में !
टूटती इस सभ्यता और संस्कृति की नींव में ,
भाईचारे प्रेम का संचार होना चाहिए !
आदमी को आदमी से प्यार होना चाहिए !!
नाज़ हमको था जहाँ अपनी विरासत पर कभी ,
रश्क़ करते थे जहाँ इसकी नज़ाक़त पर सभी !
आज वो बेज़ार क्यों है क्यूँ दिखे बीमार सी ,
क्या नहीं उसका पुनः सत्कार होना चाहिए ?
आदमी को आदमी से प्यार होना चाहिए !!
भूलकर सारी सियासत आ करें वादा अभी ,
सूखने ना देंगे जड़ अपनी विरासत की कभी !
मिल के सींचेंगे इसे हम प्रेम और सौहार्द से ,
मुरझुराया यह चमन गुलज़ार होना चाहिए !
आदमी को आदमी से प्यार होना चाहिए !!
हर गेह में अब नेह का व्यापार होना चाहिए ,
आदमी को आदमी से प्यार होना चाहिए !!
©सुनील
By Sunil Kumar Shukla

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