एक हसीं ख्वाब
- Hashtag Kalakar
- May 23, 2024
- 1 min read
Updated: Oct 3, 2024
By Pushpa Karn
रूह मेंमेरी बस गया हैतूएक हसींख्वाब की तरह
तरेेइश्क के नरू सेमैं,नि खर रही आफताब की तरह
एकांत मन की पीड़ मेंकभी ,
उठती हैकसक अरमानों की
थी अधं ेरों मेंबसर, घटुन सी येजि दं गी
पाकर तझु को रौशन हुआ ,
रूखसार मेरा माहताब की तरह
रूह मेंमेरी बस गया हैतूएक हसींख्वाब की तरह
तरेेइश्क के नरू सेमैं,नि खर रही आफताब की तरह
खोई हूं तरेेइश्क मेंइस कदर कि
जमानेकी खबर नहीं रही
हैबस तूही तूहर डगर
और कि सी की जरूरत नहीं रही
इक तरेेपहलूमेंमैंखि ल रही गलु ाब की तरह
रूह मेंमेरी बस गया हैतूएक हसींख्वाब की तरह
तरेेइश्क के नरू सेम,ैंनि खर रही आफताब की तरह
छाई जो तरेेइश्क की ख़मु ारी मझु पर
भर गयेदामन मेंमेरेगगन के चांद सि तारेसारे
खि लेखि लेमहके हुए सेहैंजीवन के सारेनजारे
आयी हैबहार यूँ मझु पर शबाब की तरह
तझु को पाकर जी रही हूं जसै ेनवाब की तरह
रूह मेंमेरी बस गया हैतूएक हसींख्वाब की तरह
तरेेइश्क के नरू सेम,ैंनि खर रही आफताब की तरह
रूह मेंमेरी बस गया हैतूएक हसींख्वाब की तरह
तरेेइश्क के नरू सेम,ैंनि खर रही आफताब की तरह।
By Pushpa Karn

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