एक शहर पुराना
By Shefali Agarwal
यूँ तो तुझमें कोई ऐसी कमी नहीं थी,
बस तुझसे मेरी कुछ ख़ास जमी नहीं थी ।
क़िस्से तेरे साथ फिर भी बहुत रहे मेरे,
पर उन गुज़रे लम्हों में ज़्यादा नमी नहीं थी ।
भुला दिये मैंने बहुत तो,
कुछ वक़्त ने धुँधला दिये हैं,
ज़ख़्म नहीं हैं अब शेष कोई दिये तेरे,
नयी ज़िंदगी ने सब मरहमा दिये हैं ।
हवा में तेरी मुझे आज पहली दफ़ा,
ना कभी जैसी कुछ बात लगी,
शिकायतें नहीं रही शायद,
इसी लिये पहली सी नरम मुलाक़ात लगी ।
गुज़रेंगे सदा ही तुझसे,
कोई और अपना रास्ता नहीं है,
करते हैं चल एक नयी शुरुआत फिर से,
जैसे तेरा मेरा पहले का कोई वास्ता नहीं है ।
By Shefali Agarwal

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