एक लेखक काफी आवारा हूँ!
By Akansha Ashok
जुगनुओं के बीच एक टूटता हुआ सितारा हूँ,
कहने को तो लेखक हूँ, पर इंसान बड़ी बंज़ारा हूँ।
मैं ही शमा हूँ तो मैं ही परवाना हूँ,
अपने खयालों से लड़ मरकर, मैं ही सत्य-असत्य के बीच की एक धारा हूँ।
मैं उस दरिया की लहर सा, एक अटूट विचार हूँ,
हज़ार सयानों के बीच, मैं लेखक काफी आवारा हूँ।
गहरी घनी रात में, जलता हुआ मशाल हूँ,
हज़ार सयानों के बीच, एक लेखक काफी आवारा हूँ!
By Akansha Ashok

Good writing
Good poem loved it kid
So deep
LOVED IT !!!!
loved it