एक बूंद आसमां
By Sachin Madhukar Gote
बिता आसमां है, शाख पे ठहरे पानी की तरह
कोई रंगीनियत उभर के आती है कभी,
यादों की रोशनी से।
एक समन्दर की धुंधली शख्सियत भी
उस बूंद में नजर आती है।
आंसूओं की सिलवटें लिए,
कुछ लहरे भी उफनती देखी है मैंने।
ना जमीं से तालुक , ना आसरा है हवाओं का,
बस किसी बेखौफ धूप में यूहीं
शाख पर सुख जाएगा,
एक बूंद आसमां।
By Sachin Madhukar Gote

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