एक बार मुझे भी देखने दो
By Pratishtha Singh
काफ़ी अरसे से मौन हूँ मैं
कुछ अब मुझे भी कहने दो
जो ख़याल दफ़्न किए थे अपने दिल में मैंने
उन ख्यालों को एक बार फिर जन्म लेने दो
अभी तो मैंने बस अपने पंख फैलाए हैं
एक बार मुझे भी तो लम्बी उड़ान भरने दो
गलतियाँ मैंने भी की हैं बेशुमार
मगर मुझे अभी और गलतियाँ करने दो
जिन लोगो ने मेरे सपनों को ग़लत बताय था
उन लोगो का ये ख़्याल बदलता तो देखने दो
देखने दो मुझसे इस दुनिआ के सारे चेहरे
और फिर उन्ही चेहरों को बदलता देखने दो
जो वादे किये गए थे मुझसे
एक बार उन वादों को टूटता हुआ भी देखने दो
जो बदल गए थे रास्ता आखिरी मोड़ पे आकर
उनको मुझे फिर से गले लगाते तो देखने दो
मैं भी हो जाउंगी सबसे अच्छी सबकी नज़रों में
एक बार उनको मुझे दूर जाता तो देखने दो
और दुनिआ तो मुझे बदनाम कर ही देगी
एक बार मेरा नाम तो होने दो ....
By Pratishtha Singh

Comments