एक प्रश्न गहरा रहा है
By Sumita Kumari
एक प्रश्न गहरा रहा है
कब तक जंग इंसानियत की
फूल उठकर चलने को ही है अभी
नोच डाले जाते है,कुछ हब्शी
हैवानों से
देश की युवतियों का सम्मान /जान है खतरे में,
बहन बेटियों का जन्म है खतरे में
कोई हैवान कब जाग उठेगा
घर से निकल कर सपने की उड़ान लिए,
बढ़ते कदम को नजर न लग जाए किसी बुरे शैतान की
डरे सहमे अभिभावक भी है
एक प्रश्न गहरा रहा है
कब तक जग इंसानियत की
By Sumita Kumari

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