एक नज़्म मौत से पहले
By Ansh Basoya
हर उतावली उम्मीद को
ज़ंजीरों से आज बांधने दो
कितने भी सुहाने हो ये सपने,
इन्हें चादर से आज झाड़ने दो
जो घिरा था अब तक ग़ैरों से,
फ़रिश्तों से मुलाक़ात उसकी कल होगी,
कल मुझे बेजान देख
ये सोच कर मुस्कुरा देना,
कि जो सालों से थी अधूरी
मेरी वो नींद अब मुकम्मल होगी।
By Ansh Basoya

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