एक दुनिया होगी ज़रूर
By Sanket S. Tripathi
एक दुनिया होगी ज़रूर, जहांँ हम तुम मिलेंगे
सिर्फ बहारों में नहीं पतझड़ में भी फूल खिलेंगे
खिलेंगे वो फूल भी जो यहाँ कभी खिले ही नहीं
भर जाएंगे वो दर्द भी, जो यहाँ कभी भरे ही नहीं
एक दुनिया होगी जरूर, जहांँ होगा हर चेहरा आईंना जैसे
जिसकी जैसी नियत, दिखेगा वो बिल्कुल वैसे
दिखेगा वो बिल्कुल वैसे जो यहाँ कभी दिखा ही नहीं
बनेंगे वो गीत भी जो यहाँ कभी बने ही नहीं
एक दुनिया होगी ज़रूर , जहां हम तुम मिलेंगे
सिर्फ बहारों में नहीं पतझड़ में भी फूल खिलेंगे
एक दुनिया होगी ज़रूर जहाँ नशे में होगा हर इंसान
मतलब के नहीं, जज़्बातों से बनेंगे रिश्तो के मकान
जज्बातों से बनेंगे रिश्तों के मकान
जो यहां कभी बने ही नहीं
हो जाएंगे वो मीत भी जो यहाँ कभी हुए ही नही
एक दुनिया होगी जरूर जहां हम तुम मिलेंगे
सिर्फ बहारों में नहीं पतझड़ में भी फूल खिलेंगे
एक दुनिया होगी ज़रूर जहां हर बच्चे को माँ का भाग मिलेगा
सिर्फ सहोदर को नहीं, सौतेले को भी अनुराग मिलेगा
सौतेले को भी अनुराग मिलेगा जो यहां कभी मिला ही नहीं छत पर लेटे एक बच्चे ने फिर तारे से यह बात कही
कि माँ !
एक दुनिया होगी जरूर जहां हम तुम मिलेंगे
सिर्फ बहारों में नहीं पतझड़ में भी फूल खिलेंगे
By Sanket S. Tripathi

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