एक दिशा मुझे भी दिखला दे।
By Meraj Fatma Khan
किताबों के पन्नों में गुम दिशाहीन जिंदगियां ,
उलझी हुई सी लगती है रंगहीन जिंदगियां ।
प्रज्ज्वलित कर ज्योत मन में फैला दे,
एक दिशा मुझे भी दिखला दे।
निकला हर रोज़ सफलता की खोज में ,
यूं ही नहीं खिला करते सरोज सरोवर की गोद में।
जीवन को कमल सा खिला दे,
एक दिशा मुझे भी दिखला दे।
धनुष की प्रत्यंचा ताने एक तीर ।
अनेक लक्ष्य सामने जान पाते गंभीर।
इस तीर को यूं न बहका दे।
एक दिशा मुझे भी दिखला दे।
पूर्व-पश्चिम- उत्तर -दक्षिण ये अनंत हैं।
नजर आता केवल क्षितिज जिसका न अंत है।
मार्ग मेरा भी सुलझा दे।
एक दिशा मुझे भी दिखला दे।
दूर कर मुझसे ये गमगीन जिंदगियां ,
लौटा दे मुझे भी रंगीन जिंदगियां ।
पङाओ का अल्प विराम न दे,
मंजिल का पूर्ण विराम दे।
एक दिशा मुझे भी दिखला दे।
✍️ मेराज फातमा खान
(राष्ट्रीय बालश्री सम्मान प्राप्त)
By Meraj Fatma Khan

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