एक गुमशुदा की तलाश
By Chandra Kant Mishra एक गुमशुदा की है तलाश, मन मेरा बहुत है हताश। देता हूँ मैं उसकी पहचान, बताना अगर मीले कोई संज्ञान। त्रिपुंड तिलक है माथे पर, फ़ैज़ी टोपी से ढका है सर।
गले में उसके क्रॉस की माला, कमर ने है कृपाण सम्भाला। हाथ जोड़ कभी मन्दिर जाता, कभी मस्ज़िद के आगे शीश झुकाता। गिरजे में भी घण्टी बजाता, गुरुद्वारे में गुरुवाणी गाता। उत्तर में उसके है गिरिवर, दक्षिण में बहता नीला सागर। पूरब उसका अरुण का आँचल, पश्चिम में फैला भूरा मरुस्थल। सतरंगी है उसका परिधान, शतकोटि उर्ध उसके संतान। उसकी उम्र पचहत्तर साल, रहता वह अपनों से बेहाल। लोग उसे सब कहते पागल, मन है उसका निर्मल निश्छल। लापता न जाने वो है कहाँ, मिलते नहीं अब उसके सभ्य निशां। उसमें बसी है हमारी जान, नाम है उसका हिन्दुस्तान।
By Chandra Kant Mishra

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