एक किताब
- Hashtag Kalakar
- Jan 10, 2025
- 1 min read
Updated: Jul 14, 2025
By Mansi Singh
वो धूल में लिपटी एक किताब थी,
कहानी पुरानी ज़रूर, पर बेहिसाब थी।
पर अफ़सोस, वो उनके हाथ थी,
बेसब्र वो, कहे नज़्म ख़राब थी।
पढ़ता ज़रूर, मगर हाथ मेरे शराब थी,
नज़र बंद वो, अनजानी बड़ी नायाब थी।
वो धूल में लिपटी एक किताब थी,
कहानी पुरानी ज़रूर, पर बेहिसाब थी
By Mansi Singh

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