एक कहानी
By Jaideep Singh
यह कहानी तब शुरू होती है | जब मैंने उसको पहली बार एक समारोह में देखा जिस का हाल कुछ ऐसे बयान करता हु | ""नशा सा है हवा मे | झुम रहा है सारा दरबार | सब पे अजीब सा खुमार है | हर पल अच्छा सा लगता है | समज्ज-ने में समय सा लगता है | कुछ खास है इस में | कहीं बार महसूस किया है | हर भर अलग सा लगता है | कोई हस रहा है ख़ुशी में | कोई गा रहा अलग सुर्र यहा | कोई बजा रहा अलग दुंन है | सब कुछ सही सा लगता है | कहीं बार दिन अच्छे आते है | अजीब सी ख़ुशी लाते है | कुछ यु ही दिन निकलते है | हर इंसान अच्छा सा लगता है |"" उसे जब पहली बार देखा तो जो भी हुआ कुछ ऐसे बयान करता हु | ""तुम हो इतनी खूबसूरत मन को मोह लेती हो | दिल करता है बता दू पर तुम जुबान से बोल ही कोह लेती हो |
करे क्या तारीफ तुम्हारी दिल डरता चुप हो जाता है | सोचा तो बहुत है कह दूँ पर तुम हो इतनी खूबसूरत परियों जैसी | तुम्हारा यह खूबसूरत रूप ही ना करवा जाता है | सोहने लोग तो बहुत है दुनिया में पर तुम जैसा कोई नही | मन यह मान बैठा है तुम सिर्फ मेरी तुम्हारे लिए कोई और नहीं |
दिल मेरा मुझे कह रहा है इतना सोचा तो बात नहीं होगी |
अगर आज बात ना की तो फिर कभी नहीं होगी | फिर हिम्मत करके मैंने मन को थोड़ा चुप किआ | बात दिल की करनी है तुम्हारे सात कुछ ऐसे मैंने इज़हार किया |"" ""जबसे देखा है पहली बार | सोच ख़ुशी में बदल जाती है | तुम हो इतनी खूबसूरत | अजीब सी हँसी मन में आती है | कितनी बार देखा है | पर मन फिर भी नहीं भरता | भर जाये कैसे मन | तुम हो इतनी खास | और हम आम से नज़र आते है |"" फिर उसने मुझसे बात की और बातों बातों मैं अपना मोबाइल नंबर दे दिया | इस तरह हमारे बीच बातों का एक सिलसिला सुर्रू हो गया |
""रिश्ते बनते है बोलने से सिर्फ याद से कुछ नहीं होता | गुफ़्तगू पर टिकी है रिश्तों की डोर | इशारो इशारो से कुछ नहीं होता | याद करना है तो उसे कर जो कभी तेरे से दूर नहीं होता | येह दुनिया तो बहुत अकेली है नादान | पर इंसान कभी अकेला नहीं होता |"" फिर बातें चलती रही और एक दिन मैंने हिम्मत करके अपने दिल की बात उस से कह दी | ""प्यार करते है तुमसे इज़हार कर नहीं पाते | दिल धड़कता है तेरे लिए तुम्हे सुना नहीं पाते | बात करते है तुमसे तो दिल खुश होता है | करने के बाद भी तुम में खोया रहता है | दिल अपनी बात कहने से डरता यह तुम्हे खोने से डरता है | हम तो अब भी तुम्हे इशारे करते है पर तुम हम्हे समझ नहीं पाते | हम तो तुम पर मरते है पर तुम्हे बता नहीं पाते | राते गुज़र जाती हैं तुम्हारी याद में | कही हम ज़माने को ना भूल जाये | तुमसे इक़रार करना चाहते हैं | कही दिल तुम्हारा रुसवा न हो जाये | तुम्हारी बातें ऐसा कुछ कह जाती हैं | सुकून दिल का लेह जाती है | तुम्हेँ पाने की सोच ख़ुशी सी लेह आती है | कोशिश पूरी हैं पर बात हमेशा अधूरी रह जाती है |"" फिर उसने मुझे अपना बना लिया और हम डेट (date) पर जाने लग्गे l उसे स्टारबक्स (starbucks)जाना बहुत पसंद था | ""शायरी सुन..तुम हमारी.. हम पर फ़िदा हो गए | डेट(date) पर जानने के लिए राजी हो गए | जाते जाते डिनर(dinner) के लिए लेट(late) हो गए | तो इतनी सी बात पे कफ़्फ़ा हो गए | पर मनाना हमारा काम है | डिंनेर(dinner) खिलाना हमारा काम है | कही रुस्वा न हो जाओ फाइव स्टार में लेजाना हमारा काम है | पर फाइव स्टार तुम्हे अच्छा न लगा | तुम्हारा मन तो फिर भी नहीं भरा | तुम्हे गुस्सा इस बात का था जाते जाते फैंसी (fancy) शरबत न मिला | तुम्हे मनाना हमारा काम है फैंसी (fancy) शरबत पिलाना हमारा काम है | तुम कही नाराज न हो जाऊ स्टारबक्स (starbucks)लेके जाना हमारा काम है | फैंसी शरबत तुम्हे अच्छा लगा पर तुम्हारा मन फिर नहीं भरा |
इससे ज़्यादा नहीं होता मोहतरमा टैक्सी मंगवाना हमारा काम है | अकेले जाने से तुम डरती हो इसलिए टैक्सी नहीं करती हो | घर पहुँचाना हमारा काम है इसलिए प्लेन मगवाना हमारा काम |
नहीं नहीं मित्रो बाइक पे घर पूछना हमारा काम है |"" कुछ ऐसे ही समय निकलता रहा और हमारा प्यार बढ़ता रहा | ""कहना है चाहते अब रुक नहीं पाते | यह बात है दिल की दिल को रोक नहीं पाते | यह क्या जोर जबरदस्ती है यह कैसा नशा है तेरा | न हो तुमसे हर-रोज़ बात तो अन्दर से खली है रह जाते | पता नहीं क्या जादू सा कर दिया तेरे को देखे बिना सुने बिना सो नहीं पाते | आती है नींद तो सपने भी तेरे ही है आते | ना तुम करों ना हम करें जो चाहें दिल वो सब करें |"" फिर कॉलेज जाने का समय आ गया और हम दोनों एक दूसरे से दूर हो गये | दोनों का कॉलेज अलग शहरों मे था इस वजह से कितने दिन मिल नहीं पात्ते थे | ""यह ज़िन्दगी तो दुरी लाती है दिलों को करीब लाने के लिए | मिलते रहेंगे तुमसे दिल की बात सुनाने के लिए | तुम हम्हें बहुत याद आओगे जाने के बाद | यह बात दिल से निकलती है | दिल की बात कैसे बताये हम | यह सोच कर शायरी निकलती है | तुमसे दुर्री उदास कर जाती है | पता चला कुछ ऐसे नादान को | जब बात नहीं होती तुमसे कभी | मन को यह बात निकामा कर जाती है | जब होते हो पास कुछ ख़ास लगता है | जब आती है दूरियाँ कुछ फरक लाती है | ऐसा आता जब समय बहुत ख़राब लगता है | फिर निकलता है समय यह आम लगता है |"" फिर जब बिच बिच मे मिलना होता था तो बहुत अच्छा लगता था | मन की ख़ुशी कुछ ऐसे बयान करता हु | ""ना लिखते है अपने लिए न किसी पराये के लिए | लिखते है पर दिल की बात लिखते है तेरे लिए | जो होता है मन मे बयान कर देते है | जो है इस दिल की ख़ुशी शब्द यह कह देते है | कभी दूर हो हमसे कभी पास होते हो | पर मुझे तुम हर रोज याद आते हो अजीब सी ख़ुशी लाते हो | हम तुमसे मिलना चाहतें है वो गुजरे पल याद आते है | हमको अपनी याद में रखना हमसे प्यार बारी बातें करना | हम बस इतना ही चाहतें है बस इतना ही चाहतें है |"" कुछ यूं ही समय निकलता रहा | दुरी तो थी पर एक दूसरे के प्यार का एहसास भी था | पर फिर कोरोना (corona)की आंधी आयी | उस समय का मंज़र कुछ ऐसे बयान करता हूँ | ""क्या मंज़र सा बना दिया है | हर घर कंदर सा बना दिया है | जहा घूमता था खुशी में मै | उस जगह को ही बंजर बना दिया है | इंसान असहाये से नज़र आते है | दिल से घबराये से नज़र आते है | देखता हु यह नम्म आखें तो दिल भर आता है | हम चाहें तो कैसे इन्हे सुकून दे | सुकून अब बहुत दूर नज़र आते है | यह जो लाशो का बाजार नज़र आता है | जहा देखे दुःख का पहाड़ नज़र आता है | यह चिताओं की रौशनी उजाला कर रही है | कितनी ज़िंदगीआ अंधेरे से बाहर रही है | इतना दुख है यहाँ बता नहीं सकते | किस्को सुनाओ सूना नहीं सकते | जिसको बताना चाहें दुख आपने | वो खुद कितना दुखी है समझा नहीं सकते | कोई बचा हो इस आंधी से हमें भी बतायो | दुख बांटना है अपना कोई पता तो बतायो | शहर में ढूंढा तो मंज़र कुछ और था | आंधी से कोई बचा नहीं... कोई है तो बतायो कोई है तो बतायो |"" फिर वो हुआ जिस्का डर था | वो इस आंधी मे मुझे अकेला छोड़ कर चली गयी | ""अपनी हालत कुछ ऐसे बयान करता है | की जीने के ख्याल अब मुर्दा कर जाते है | इतना अकेलापन लगता है ख्यालो मैं | यह ख्याल सब बेहाल कर जाते है | जब होता है प्यार क्या कमाल होता है | जो देता है एहसास क्या कमाल देता है | जो मिलता है सुकून क्या कमाल मिलता है | जब होता सब ख़तम क्या हाल होता है | जब आता है दुःख तब पता चलता है | जब होता है दर्द.. क्या हाल करता है | जब बयान करता है कोई .तब डर लगता है | जिसे होता है उसे ही पता चलता है | समझ आती है तब..जब कुछ नहीं बचता | कुछ ऐसा हो जाता है इंसान इसमें जिन्दा हो कर भी मुर्दा है लगता |"" दुनिया को अब क्या कहे | अपना हाल कैसे सुनाएं | ""तुम कौन हो क्या हो क्या फरक पढता है | मेरा कोई चले जाए तुम मस्त हो | तुमारा कोई चले जाये में मस्त हु | तुम और हम चले जाये ज़माना मस्त है | हम कौन तुम कौन क्या फर्क पढता है | फर्क पड़ता है उसे जो प्रेम करता है | फर्क पड़ता है उसे जो तुम पे मरता है | फर्क पड़ता है उसे जो तुम पर निर्भर है | तुम हो तो ज़िन्दगी है ..नहीं तो फर्क पड़ता है | कोई नहीं किसी का.. किसी के हम नहीं | जिसका का कोई नहीं ख़ुदा है उसका | ज़माना एक खेल है कोई समझता नहीं | वो समझता है ख़ुदा है जिस का |"" ज़माने को क्या पता मेरे दिल की हालत | ""ज़माना तो इसे यार कहता है | पर अपनों में सौतेला है | यह जानता सब को है | पर अन्दर से अकेला है | देखने पर खुश दिखता है | पर दिल ग़म मै डूभा है | हालत किसी की क्या है | ज़माना तो जानता नहीं | इंसान दिखाने मैं खुभ है | पर कुध को पेचानता नहीं |"" यह दिल लगाना, यह प्यार ,यह तुम्हारे साथ बिताये सुहाने पल कैसे भूल जाऊ | ""लग जाये जो दिल से फिर मिट्ट-ता नही | मिटाना चाहें तो ज़ख्म बन जाता है | भर जाये यह ज़ख्म समय दे कर | पर दिल पहले जैसे धड़कता नहीं | दर लगता है दिल फिर लगाने से | दर लगता है दोबारा छोट खाने से | बहुत कोशिश की इसे समजाने की | दिल तो फिर भी मानता नहीं | दिल हॉर रहा है पता चला | कुछ बोल रहा है पता चला | पता चला कुछ ऐसे मुझे | दर्द होता है तुम्हे याद करके | यह जो ख़िलता था मुरजां सा गया है | यह जो हरियाली थी सुख़ सी गई है | यह जो रौशनी थी अब सब अंधेरा है | यह जो दीया जला था भुज गया है भुज गया है |"" अब तो अकेले रहने की आदत हो गयी है | ""ज़िन्दगी गुज़र रही है अकेले मन मेरा उदास है | नदी के किनारे रहता है दिल हलके हलके बह रहा है | अब तो मन कहता है मरके उसके पास चले जाये | पर डरते है की मरके भी वोह ना मिले तो कहा जायेंगे |""
By Jaideep Singh

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