एक आखिरी पन्ना
By Laxmi Guria
एक आखिरी पन्ना ,
मेहेंगे शब्द यह कुछ ऐसे दावा करे ,
कोरे सफ़ेद सी आँखें इसकी
काली-भूरी दो मोतियों से यह दुनिया देखे |
कई आए अपने प्यार से इसे भिगाने ,
कई गए अपने बिखरे दिल को फिर से तोड़ने ,
पंखों के बिना उड़ना सीखा है ,
मंज़िल के बिना चलना सीखा है ,
इंतज़ार इसे बस किसका है ,
सवाल हज़ार हैं पर जवाबों से इसका न कोई रिश्ता है |
आज कुछ सुनहरे धागों से
बुनाया मैंने एक वादा है ,
पूरा न सही पर आधा
आज का किराया है |
एक बात छिपाई है मैंने दिल की
शब्दों के बहाने से ,
अगर तुमने उसे पकड़ लिया हो ,
तो मिले तुम्हे भी वो कोई ऐसी अजनबी कहानी में |
By Laxmi Guria

Comments