ए दिल तू इन बातोंसे क्यूं रोता है?
By Atharva Arvind Andore
ए दिल तू इन बातोंसे क्यूं रोता है? देखा है इक रात, इक ख्वाब मैने देखा है, पर इन ख्वाबोंका रास्ता इतना मुश्किल क्यूं होता है? ए दिल तू इन बातोंसे क्यूं रोता है? चलता हूं अपनी मंजीलकी और पर दिल में मेरे कोई फिक्र होती है, कोई लम्हा तो कोई इंसान जिम्मेदार होता है, छोडकर फिकरे सारी क्या सबकुछ ठीक होता है? ए दिल तू इन बातोंसे क्यूं रोता है?
दोस्ती-यारी की हजार यादें होती है, कभी लौटकर ना आ सकें ऐसा इक लम्हा जरूर होता है, रिश्तोंका असली एहसास सिर्फ दोस्तोंको क्यूं होता है? ए दिल तू इन बातोंसे क्यूं रोता है? सुकून तो सबसे मेहेंगा होता है, मिलता कम है उसे कमाना पडता है, जो ले गया दिल का टुकडा उसका इंतजार क्यूं करता है? जोडनेवाला इसी जनम मिलता है! ए दिल तू इन बातोंसे क्यूं रोता है?
By Atharva Arvind Andore

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